चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव

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चुनाव आयोग ने किए 11 प्रमुख बदलाव –

इन बदलावों के तहत आगामी चुनाव सम्पन्न होंगे। आगामी माह मे पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखें जारी की जा चुकी हैं।  देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में 4 फरवरी से विधानसभा चुनाव कराए जाने की घोषणा चुनाव आयोग ने की है. जो विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न तिथियों में आयोजित किए जाएंगे.

चुनाव आयोग का मानना है के इन बदलावों के चलते आगामी चुनाव पहले से काफी भिन्न और प्रक्रिया मे सरल हो जाएंगे। आम मतदाता के लिए भी जटिलताओं को निम्न करने की कोशिश इन चुनाव मे बदलावों के माध्यम से की जाएगी जो देश के आगामी चुनावों के लिए आधार बनेंगे.

चुनाव आयोग ने 11 प्रमुख बदलाव किए हैं-

ईवीएम से पर्ची निकलेगी-

  • सम्पूर्ण राज्य में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम से डाले जाने वाले वोटों की रसीद यानि पेपर ट्रेल का हिसाब रहेगा.
  • वोटिंग के बाद एटीएम की तरह ईवीएम से भी कागज की पर्ची निकलेगी. यह पर्ची करीब 15 सेकेंड तक वोटर को दिखने के बाद वापस मशीन के ही अंदर बने कंपार्टमेंट में गिर जाएगी.
  • ऐसा इसलिए किया गया है कि ईवीएम मशीन का बटन दबाए जाने पर आवाज तो आती है, किन्तु वोट हुआ या नहीं इसका स्पष्ट संज्ञान नहीं मिलता.
  • इस वर्ष विधानसभा चुनाव में मतदाता को वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानि (VVPAT) की सुविधा होगी.

फोटो युक्त मतदान पर्ची-

  • इस वर्ष विधानसभा चुनाव में मतदान से पूर्व चुनाव आयोग प्रत्येक मतदाता के घर तक वोटरों की फोटो युक्त मतदान पर्ची पहुंचाएगा.
  • इस बार यह मतदाता पर्ची सिर्फ पर्ची नहीं, अपितु वोटरों का पहचान पत्र भी होगा.
  • ए-4 साइज कागज के आधे भाग पर छपी इस पर्ची पर वोटरों की तस्वीर के साथ बार कोड भी होगा तथा अन्य सम्बंधित जानकारियाँ भी अंकित रहेंगी.
  • मतदाता पर्ची पर पर्ची के पीछे गूगल मैप के माध्यम से बूथ तक पहुंचाने का रास्ता भी बताया जाएगा.
  • साथ ही पर्ची पर यह भी हिदायत अंकित होगी कि वोटिंग के समय क्या-क्या पत्रावली साथ ले जाना आवश्यक है.

वोटर गाइड का प्रयोग –

  • मतदाता पर्ची के साथ प्रत्येक घर में वोटर के लिए रंगीन ब्रोशर यानि `वोटर गाइड` पुस्तिका भी पहुंचाई जाएगी.
  • वोटर गाइड` पुस्तिका हिन्दी, अंग्रेजी सहित स्थानीय भाषाओं में प्रकाशित होगी. इस पुस्तिका में मतदान की तिथि, समय और चित्रों के माध्यम मतदाता सूची में नाम डलवाने से लेकर वोट डालने की प्रक्रिया और मतदाता के अधिकारों की बातें भी समझाई गई हैं.

मतदाता सुविधा काउंटर-

  • इन विधान सभा चुनावों में पहली बार प्रत्येक बूथ पर मतदाता सुविधा काउंटर खोला जाएगा.
  • मतदाता सुविधा काउंटर में मौजूद अधिकारी मतदाता को उसके बूथ, मतदाता सूची में उसके नाम के बारे में बताएंगे.
  • इसके अलावा मतदान बूथ के आसपास समुचित साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे.

जन सुविधाएँ-

  • मतदान केंद्र पर न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा. जैसे पीने का पानी, पर्याप्त रोशनी, शौचालय, दिव्यांगों हेतु रैंप, वोटिंग कंपार्टमेंट आदि.

वोटिंग कंपार्टमेंट-

  • इन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रथम बार ईवीएम वोटिंग मशीन के चारों ओर स्टील ग्रे रंग के फ्लेक्स जैसे प्लास्टिक शीट का बना 30 इंच ऊंचाई का वोटिंग कंपार्टमेंट बनाया जाएगा.
  • वोटिंग कंपार्टमेंट को उस टेबल पर चारों ओर लगाया जाएगा, जहां ईवीएम रखा जाएगा.
  • अब तक हुए चुनावों में 12 से 18 इंच ऊंचाई का फटा पुराना गत्ता प्रयोग किया जाता था.
  • इससे मतदाता के सिर और आंखों की हलचल से यह आभास हो जाता था कि वोट किस प्रत्याशी को दिया गया है.
  • मतदान की गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से इस बार 30 इंच ऊंचा वोटिंग कंपार्टमेंट बनाया जाएगा.

महिला बूथ-

  • चुनाव प्रक्रिया नियम 1961 के नियम 31 के तहत मतदान केंद्र पर प्रथम बार मतदाता को प्रदत्त सुविधाओं और उनमें जागरूकता बढ़ाने वाला पोस्टर लगाया जाएगा.
  • ऐसे चार पोस्टर प्रत्येक मतदान केंद्र पर लगाए जाएंगे.
  • जिन क्षेत्रों में महिला वोटरों की संख्या अधिक है, वहां उनके लिए अलग से एक बूथ बनाया जाएगा.
  • महिला बूथ पर चुनाव अधिकारी से लेकर चुनाव एजेंट तक महिलाएं ही नियुक्त की जाएंगी.

दृष्टिहीन मतदाता-

  • अंध विद्यालयों में बनाए गए मतदान केंद्रों में दृष्टिहीन मतदाता हेतु खास सुविधाएं प्रदान की जसेंगी.
  • दृष्टिहीन मतदान अधिकारियों को ऐसे ही बूथों पर तैनात किया जाएगा, ताकि वोटर और मतदान अधिकारियों को अधिक दूर न जाना पड़े.

ईटीबीपीएस (ETPBS)

  • वर्ष 2017 में आयोजित किए जाने वाले पांच विधानसभा चुनावों से चुनाव आयोग पहली बार सेना, अर्धसैनिक बलों हेतु इलेक्ट्रोनिक्ली ट्रांसमिटेड पोस्टर बैलेट सिस्टम यानि ईटीबीपीएस (ETPBS) का इंतजाम भी करेगा. इस प्रक्रिया का पायलट ट्रायल भी किया जा चुका है.

नो डिमांड सर्टिफिकेट-

  • दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय के बाद पहली बार उम्मीदवार के लिए नो डिमांड सर्टिफिकेट का अतिरिक्त हलफनामा भी नामांकन पर्चों के साथ दाखिल करना आवश्यक होगा. यानि चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार पर बिजली, पानी, टेलीफोन, संपत्ति कर, जैसे नागरिक सेवाओं वाली एजेंसियों का कोई बकाया नहीं है, इससे सम्बंधित प्रमाणपत्र सम्बन्धित विभाग से प्राप्त कर जमा करना होगा.

ई-फाइलिंग-

  • कानून मंत्रालय की अधिसूचना के बाद प्रथम बार नए प्रारूप वाले नामांकन पत्र पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अपना नॉमिनेशन फाइल करेंगे.
  • उम्मीदवार इन नए प्रारूप वाले फॉर्म और हलफनामों की ई-फाइलिंग भी कर सकेगा.

वर्ष 2017 में पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च के महीने में चुनाव आयोग द्वारा आयोजित कराए जा रहे हैं , चुनाव विशेषज्ञों का मानना है की इन महीनों में मतदान का प्रतिशत सर्वाधिक रहा है.

पूर्व में हुए चुनाव आकडे-

चुनाव वर्ष महीने के अनुसार वोट पूर्व के मतदान आकडे (प्रतिशत) में –

  • वर्ष 1996 सितंबर-अक्टूबर 55.87 फीसदी
  • वर्ष 2002 फरवरी-मार्च 54.61 फीसदी
  • वर्ष  2007 अप्रैल-मई 46.38 फीसदी
  • वर्ष  2012 फरवरी-मार्च 59.4 फीसदी

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